
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009
मंगलवार, 1 सितंबर 2009
सोमवार, 23 मार्च 2009
बदलाव
बदलाव
था मैं उसका सुदामा
पर वो न बन पाया कृषण
कृषण होते हुए भी कर गया इनकार
कहा मैं नही कृषण
थी तो मैं उसकी द्रोपदी
पर वो न बन पाया कृषण
था तो मैं उसका अर्जुन
पर वो न बन पाया कृषण
मैं था तो उसका बलराम
पर वो न बन पाया कृषण
कृषण होते हुए भी कर गया इनकार
मैं बनी भी उसकी शबरी
पर वो राम होते हुए भी न कर पाया स्वीकार
मैं था तो उसका हनुमान
पर वो राम होते हुए भी न कर पाया स्वीकार
अब मंशा तो यही हैं की बनू रावन और कंस
ताकि वो अब तो बन जाए मेरा कृषण और राम
उद्धार हो जाए उसके हाथो से मेरा
ताकि दुनिया मैं हो उसकी जय जयकार
शनिवार, 8 नवंबर 2008
obama
रोजी
शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2008
वादिया

रविवार, 19 अक्टूबर 2008
इन्तजार में
कितनी सुंदरहोती हैं चिड़िया
चहकती हुई कही पर भी चली जाती हैं
लेकिन देखो इस चिड़िया को
कैसे शांत बैठी हैं एक डाल पर
न जाने किसके इन्तजार में
जो हर जगह चली जाती हैं
घने बादलो के बीच मेंदेखो कैसे बैठी हैं
उसके इन्जार में
थक कर बैठ गई हैं उसी के इतजार में
यह फोटो दीपचंद्र तिवारी जो की फोटो खीचने में माहिर हैं यह उनकी फोटो हैं जिस पर मने कुछ पंक्तिया लिखी हैं



