गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

कला

हाथ से बनी कला, कितनी सुंदर हैं ,

मंगलवार, 1 सितंबर 2009

देश


मेरे देश का भविष्य क्या यह हैं ?
आजादी के ६२ साल बाद भी मेरा देश हैं ऐसा !

सोमवार, 23 मार्च 2009

बदलाव

बदलाव

था मैं उसका सुदामा

पर वो न बन पाया कृषण

कृषण होते हुए भी कर गया इनकार

कहा मैं नही कृषण

थी तो मैं उसकी द्रोपदी

पर वो न बन पाया कृषण

था तो मैं उसका अर्जुन

पर वो न बन पाया कृषण

मैं था तो उसका बलराम

पर वो न बन पाया कृषण

कृषण होते हुए भी कर गया इनकार

मैं बनी भी उसकी शबरी

पर वो राम होते हुए भी न कर पाया स्वीकार

मैं था तो उसका हनुमान
पर वो राम होते हुए भी न कर पाया स्वीकार

अब मंशा तो यही हैं की बनू रावन और कंस

ताकि वो अब तो बन जाए मेरा कृषण और राम

उद्धार हो जाए उसके हाथो से मेरा

ताकि दुनिया मैं हो उसकी जय जयकार

शनिवार, 8 नवंबर 2008

obama



ओबामा भारत के प्रति मित्रता का भावःरखते हैं लेकिन उनका भारत और पाक के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बिल किल्टन को विशेष दूत बनाना क्या सही हैं वैस देखा जाए तो वह भारत और पाक के बीच में शांतिप्रिय संबध को बनाने में हैं


जबकि भारत इस मामले में किसी तीसरे देश को नही चा रहा हैं

रोजी



मेरठ में हुए बम धमाके में कई घरो के चिराग बुझ गए अब वहा की हालात बड़े ही बदतर हो गए


देखो इस बच्चे को इसका बाप चल बसा


पर भूख में क्या करे आखिर कब तक रोयेगा


लेकिन बाप के गम में कब तक रोयेगा


अब तो उसे अपनी रोजी के लिए सोचना हैं


अभी तो सरकार ने खाना दे दिया


लेकिनएकं कल कौन खाना देगा

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2008

वादिया


यह फोटो मेरे एक साथी दीपचंद्र तिवारी की हैं जो फोटो खीचने में महारथ हासिल किए हुए हैं उनकी इस फोटो को देख कर मैंने कुछ पंक्तिया लिखी हैं..... हर किसी को पसंद आयेंगी

खूबसूरत यह समा हैं या फिर तेरा आगाज या फिर इतनी सुंदर इन वादियों में

किसी ख़ास के होने का गहरा एहसास

इन वादियों को छूते ये बादल जैसे लगता हैं

वादियों को हो इनसे कुछ काम

और इन वादियों को हो किसी के आने का एहसास

इन वादियों के बीच में नशे चूर यह बादल कर रहे हो

किसी ख़ास के होने का एहसास

रविवार, 19 अक्टूबर 2008

इन्तजार में






कितनी सुंदरहोती हैं चिड़िया



चहकती हुई कही पर भी चली जाती हैं



लेकिन देखो इस चिड़िया को



कैसे शांत बैठी हैं एक डाल पर



न जाने किसके इन्तजार में



जो हर जगह चली जाती हैं

घने बादलो के बीच में

देखो कैसे बैठी हैं

उसके इन्जार में



थक कर बैठ गई हैं उसी के इतजार में



यह फोटो दीपचंद्र तिवारी जो की फोटो खीचने में माहिर हैं यह उनकी फोटो हैं जिस पर मने कुछ पंक्तिया लिखी हैं